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International Journal of
Sociology and Political Science
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VOL. 7, ISSUE 4 (2025)
रामगढ़ जिले में उराँव जनजातीय महिलाओं की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण
Authors
सुमन कुमारी, डॉ रश्मि
Abstract
रामगढ़ जिले में उराँव जनजातीय महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर्यावरणीय क्षरण और पारंपरिक आजीविका के संकट से गहराई से प्रभावित है. झारखंड के गठन और वनाधिकार कानून जैसी नीतियों के लागू होने के बाद भी इन महिलाओं के जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं आया है. वनों के उजड़ने और पत्थर उत्खनन जैसी गतिविधियों के कारण पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हुआ है, जिसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ा है. पारंपरिक रूप से, उराँव महिलाएं जंगलों से लकड़ी, कंद-मूल और मौसमी फल एकत्र करने जैसे कार्यों तथा रेशम धागा, तसर और लाह उत्पादन जैसे कुटीर उद्योगों पर निर्भर थीं. हालाँकि, जंगलों के लगातार सिमटने और इन कुटीर उद्योगों के लगभग लुप्त हो जाने के कारण उनकी आय के यह पारंपरिक स्रोत अब उपलब्ध नहीं रहे हैं. इस आर्थिक संकट का प्रमुख परिणाम बड़े पैमाने पर पलायन के रूप में सामने आया है। रोजगार की तलाश में आदिवासी युवतियों और महिलाओं को गाँव छोड़कर बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जहाँ वे अक्सर कम मजदूरी पर शारीरिक श्रम का काम करती हैं. इन चुनौतियों के बावजूद, समाधान का रास्ता वन आधारित आजीविका और कुटीर उद्योगों को पुनर्जीवित करने तथा पर्यावरण संरक्षण के कार्यक्रमों में इन महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने में निहित है. साथ ही, झारखंड जैसे संसाधन-संपन्न क्षेत्र में भी व्याप्त गरीबी और कुपोषण जैसी समस्याएं इस बात का संकेत हैं कि समग्र विकास के लिए केवल नीतियां बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
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Pages:21-24
How to cite this article:
सुमन कुमारी, डॉ रश्मि "रामगढ़ जिले में उराँव जनजातीय महिलाओं की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 7, Issue 4, 2025, Pages 21-24
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