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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
बिहार में पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण: राजनीतिक सशक्तीकरण और जमीनी लोकतंत्र का अध्ययन
Authors
डॉ. सुधा कुमारी
Abstract
भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सामाजिक न्याय, समानता और समावेशी शासन की महत्वपूर्ण आधारशिला है। संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान करते हुए स्थानीय स्वशासन में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के लिए न्यूनतम एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया। बिहार ने इस दिशा में अपेक्षाकृत अग्रणी भूमिका निभाते हुए पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया। इस व्यवस्था ने ग्रामीण बिहार में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के स्वरूप को व्यापक रूप से परिवर्तित किया है। बड़ी संख्या में महिलाएँ ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद जैसी संस्थाओं में निर्वाचित होकर स्थानीय शासन का हिस्सा बनी हैं। यह अध्ययन बिहार में महिला आरक्षण के माध्यम से हुए राजनीतिक सशक्तीकरण तथा जमीनी लोकतंत्र के विस्तार का विश्लेषण करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि आरक्षण ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी, निर्णय-निर्माण, नेतृत्व क्षमता, राजनीतिक जागरूकता और सामाजिक स्थिति को किस सीमा तक प्रभावित किया है। साथ ही, यह अध्ययन ‘प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व’ या ‘मुखिया-पति/सरपंच-पति’ जैसी प्रवृत्तियों, पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना, जाति, आर्थिक निर्भरता और प्रशासनिक बाधाओं को महिला राजनीतिक सशक्तीकरण की प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित करता है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि महिला आरक्षण ने बिहार में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के पारंपरिक ढाँचे को महत्वपूर्ण रूप से बदला है, किंतु प्रतिनिधित्व को वास्तविक राजनीतिक सशक्तीकरण में बदलने के लिए राजनीतिक प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग, डिजिटल एवं प्रशासनिक साक्षरता तथा सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन आवश्यक है।
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Pages:140-145
How to cite this article:
डॉ. सुधा कुमारी "बिहार में पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण: राजनीतिक सशक्तीकरण और जमीनी लोकतंत्र का अध्ययन". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 140-145
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