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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
ई- गवर्नेंस एवं नागरिक केंद्रित प्रशासन - एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
ममता गौड़
Abstract
सारांश - वर्तमान युग सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का युग है, जिसने शासन प्रशासन की पारंपरिक अवधारणाओं को पूर्णतः परिवर्तित कर दिया है। अब शासन केवल आदेश देने या नीतियाँ बनाने तक सीमित नहीं रह गया है, वरन यह नागरिकों तक पारदर्शी, त्वरित और सुलभ ढंग से सेवाएँ पहुँचाने का माध्यम बन गया है। इस परिवर्तन को साकार करने में ई-गवर्नेंस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ई-गवर्नेंस शासन की उन प्रक्रियाओं को संदर्भित करता है जिनमें सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर सरकारी सेवाओं को अधिक कुशल, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया जाता है। इसके माध्यम से सरकार, नागरिकों और व्यावसायिक संस्थाओं के बीच संबंध अधिक सुदृढ़ होते हैं तथा शासन जनोन्मुखी और सेवा-उन्मुख स्वरूप धारण करता है। ई-गवर्नेंस के अंतर्गत ऑनलाइन सेवाएँ, मोबाइल एप्लिकेशन, डिजिटल पोर्टल और शिकायत निवारण प्रणाली जैसी व्यवस्थाएँ नागरिकों को शासन की प्रक्रियाओं से सीधे जोड़ती हैं — जो नागरिक-केंद्रित प्रशासन की मूल भावना भी है। भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए डिजिटल इंडिया, ई-डिस्ट्रिक्ट और कॉमन सर्विस सेंटर जैसे कार्यक्रम इसी दिशा में सार्थक प्रयास हैं, जिनका उद्देश्य शासन को नागरिकों के अधिक निकट लाना और प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाना है। प्रस्तुत शोध पत्र में नागरिक-केंद्रित प्रशासन में ई-गवर्नेंस की भूमिका का विश्लेषण किया गया है ,अध्ययन हेतु द्वितीयक स्रोतों सरकारी रिपोर्टें, नीतिगत दस्तावेज, शोध लेख, तथा ई-गवर्नेंस पोर्टल से प्राप्त जानकारी का उपयोग किया गया है, । शोध की पद्धति वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक है, जिसके माध्यम से यह समझने का प्रयास किया गया है कि ई-गवर्नेंस नागरिक-केंद्रित प्रशासन को किस प्रकार प्रभावित कर रहा है।
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Pages:105-107
How to cite this article:
ममता गौड़ "ई- गवर्नेंस एवं नागरिक केंद्रित प्रशासन - एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 105-107
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