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VOL. 8, ISSUE 2 (2026)
भारतीय राजनीति में डिजिटल सशक्तीकरण और नवीन सोच की प्रासंगिकता
Authors
दीपक नाथ, डॉ. हेमा
Abstract
भारतीय राजनीति में डिजिटल सशक्तिकरण और नवीन सोच ने पारम्परिक राजनीतिक परिदृश्य को "डिजिटल लोकतन्त्र" में बदल दिया है, जो शासन, जन-भागीदारी और चुनावी रणनीतियों को मौलिक रूप से पुन: परिभाषित कर रहा है। 2014 से शुरू हुए 'डिजिटल इण्डिया ' मिशन ने शासन ( ई - गवर्नेस) को आम नागरिक तक पहुँचाया है और 2024-25 तक यह एक जन आनदोलन बन चुका है। इस अध्ययन से हम यह जान पायेंगे की 'डिजिटल इण्डिया' ने तकनीक को सुलभ बनाकर नागरिकों को कैसे सशक्त किया है। अब यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन आन्दोलन है। तकनीकी हस्तक्षेप का उपयोग 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में किया जा रहा है, जिसमें (AI) को मानव- केन्द्रित (Human - Centric) बनाने पर जोर है। यह शोध ये बतायेगा कि कैसे डिजिटल इण्डिया ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की डिजिटल खाई को कम किया है और दूरदराज के क्षेत्रो तक कनेक्टिविटी पहुंचाई हैं। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (जैसे UPI, (आधार) ने शासन में पारदर्शिता बढाई हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर सामान्य सेवा केन्द्र (CSC) के माध्यम से 800 से अधिक सेवाएं सीधे जनता को मिल रही हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है। टविटर (X), फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप ने नेताओं को सीधे मतदाताओं से जाता हैं। 'क्रिएटर्स कॉर्नर' जैसे मंचो ने सोशल मीडिया इन्फलुएंसर्स को राज- नीतिक संचार में महत्वपूर्ण बना दिया है। संक्षेप में, भारतीय राजनीति अब " डिजिटल इण्डिया" के माध्यम से एक स्मार्ट, समावेशी और डेटा-संचालित युग में प्रवेश कर चुकी है, जो सुशासन के लिए, नवीन सोच को अपना रही हैं।
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Pages:23-26
How to cite this article:
दीपक नाथ, डॉ. हेमा "भारतीय राजनीति में डिजिटल सशक्तीकरण और नवीन सोच की प्रासंगिकता". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 8, Issue 2, 2026, Pages 23-26
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