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International Journal of
Sociology and Political Science
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VOL. 8, ISSUE 1 (2026)
स्वामी विवेकानंद के चिंतन पर आधारित प्रमुख शोध अध्ययनों का समीक्षाात्मक विश्लेषण
Authors
प्रो. डॉ. वंदना शर्मा, अशोक यादव
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र में भारत तथा विदेशों में स्वामी विवेकानन्द के सामाजिक, शैक्षिक, दार्शनिक और मानवीय चिंतन पर किए गए प्रमुख शोध अध्ययनों की समीक्षा की गई है। उपलब्ध साहित्य से स्पष्ट होता है कि स्वामी विवेकानन्द के विचार शिक्षा, राष्ट्रवाद, सामाजिक समरसता, मानवतावाद, जाति-व्यवस्था, धार्मिक सहिष्णुता, नेतृत्व तथा सामाजिक पुनर्निर्माण जैसे अनेक विषयों में व्यापक रूप से अध्ययन का विषय रहे हैं। भारतीय संदर्भ में समकालीन शोधों ने विशेष रूप से उनके शिक्षा-दर्शन, चरित्र-निर्माण, आत्मनिर्भरता तथा मानव-निर्माण की अवधारणा को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना है।
तिवारी एवं यादव के अध्ययन में विवेकानन्द के शैक्षिक चिंतन को भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से जोड़ते हुए यह प्रतिपादित किया गया है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना या रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति में निहित पूर्णता का विकास करना है। इसी प्रकार अन्य शोधों में उनके विचारों को चरित्र-निर्माण, आत्मनिर्भरता, मानवतावाद तथा सर्वांगीण विकास के लिए उपयोगी बताया गया है। शर्मा एवं अग्रवाल तथा रेनू एवं चौहान के अध्ययनों में विवेकानन्द के शिक्षा-दर्शन को आधुनिक शिक्षा के लिए अत्यंत प्रासंगिक माना गया है।
स्वामी विवेकानन्द के सामाजिक और राजनीतिक चिंतन पर हुए अध्ययनों से यह स्पष्ट होता है कि उनका दर्शन सामाजिक समरसता, मानव-सेवा, राष्ट्रीय जागरण और सामाजिक पुनर्निर्माण पर आधारित था। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम माना तथा समाज के कमजोर एवं उपेक्षित वर्गों के उत्थान पर विशेष बल दिया। पूर्ववर्ती शोधों में ‘दरिद्रनारायण’ की अवधारणा, आध्यात्मिक मानवतावाद, जातिगत असमानता के विरोध तथा महिला शिक्षा और धार्मिक सहिष्णुता के संबंध में उनके विचारों का विश्लेषण किया गया है।
विदेशों में भी स्वामी विवेकानन्द के विचारों पर व्यापक शोध हुआ है। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और जापान सहित अनेक देशों के विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों ने उनके वेदान्त दर्शन, योग, मानवतावाद, धार्मिक बहुलवाद, शिक्षा-दृष्टि, नेतृत्व तथा पूर्व और पश्चिम के सांस्कृतिक संवाद में योगदान का अध्ययन किया है। अमेरिकी शोधों में उन्हें भारतीय आध्यात्मिकता को आधुनिक और सार्वभौमिक रूप में प्रस्तुत करने वाले विचारक के रूप में देखा गया है। ब्रिटिश अध्ययनों ने आधुनिक हिन्दू धर्म, भारतीय राष्ट्रवाद और धार्मिक बहुलवाद के विकास में उनके योगदान को महत्वपूर्ण माना है। जर्मन विद्वानों ने उनके व्यावहारिक वेदान्त, मानव-सेवा और आधुनिक हिन्दू चिंतन का गहन विश्लेषण किया है।
अन्य देशों में हुए शोधों से भी यह निष्कर्ष निकलता है कि विवेकानन्द केवल भारत के आध्यात्मिक गुरु नहीं, बल्कि विश्व मानवता के चिंतक थे। उनके विचार धार्मिक सहिष्णुता, विश्व शांति, मानव समानता, नेतृत्व, योग, व्यक्तित्व विकास तथा अंतरसांस्कृतिक संवाद के लिए आज भी प्रासंगिक हैं।

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Pages:131-136
How to cite this article:
प्रो. डॉ. वंदना शर्मा, अशोक यादव "स्वामी विवेकानंद के चिंतन पर आधारित प्रमुख शोध अध्ययनों का समीक्षाात्मक विश्लेषण". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 8, Issue 1, 2026, Pages 131-136

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स्वामी विवेकानंद के चिंतन पर आधारित प्रमुख शोध अध्ययनों का समीक्षाात्मक विश्लेषण | International Journal of Sociology and Political Science