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VOL. 8, ISSUE 1 (2026)
छत्तीसगढ़ की उरांव जनजाति में महुआ वृक्ष का सामाजिक-आर्थिक महत्व
Authors
नीलम संजीव एक्का
Abstract
प्रस्तुत शोधपत्र मानव के जीवन यापन की एक ऐसी पुरातन पद्धति पर आधारित है जो कि वृक्ष पर मानव के बहुआयामी निर्भरता को इंगित करता है| छत्तीसगढ़ में निवासरत विभिन्न जनजातियों में से एक महत्वपूर्ण जनजाति उरांव की विविध आवश्यकताएं विशेषकर सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति महुआ वृक्ष से होती है| उरांव जनजाति की परंपरागत जीवन शैली में महुआ वृक्ष की उपयोगिता का अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रकृति पर मानव की निर्भरता को गहराई से रेखांकित करते हुए मानव जीवन के लिए प्रकृति की आवश्यकता और महत्ता स्थापित करने कि दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है| प्रस्तुत अध्ययन में यह उजागर करने का प्रयास किया गया है कि उरांव जनजाति की सामाजिक - आर्थिक सहित अन्य आवश्यकताओं कि पूर्ति महुआ वृक्ष द्वारा किस प्रकार होती है?
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Pages:116-118
How to cite this article:
नीलम संजीव एक्का "छत्तीसगढ़ की उरांव जनजाति में महुआ वृक्ष का सामाजिक-आर्थिक महत्व". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 8, Issue 1, 2026, Pages 116-118
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