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VOL. 7, ISSUE 4 (2025)
गांधीजी का मानवतावादी दर्शन और अन्तर्जातीय विवाहः वैश्विक समता की दिशा में एक कदम
Authors
विधि वर्मा, डॉ. मीरा सिंह
Abstract
भारतीय सामाजिक व्यवस्था में जाति प्रथा, सांस्कृतिक असमानता और भेदभाव अन्तर्जातीय विवाहों के लिए अभिषाप स्वरूप रहे हैं। यद्यपि अन्तर्जातीय विवाह के अन्तर्गत दो विभिन्न जाति या उपजाति के व्यक्तियों का आपस में विवाह होता है, यह अनुलोम और प्रतिलोम के रूप में प्रचलित हो सकते हैं, इस प्रकार के विवाहों का प्राचीन काल में भी अनेकों उदाहरण मिलते है। जातिगत रूढ़ियों से बंधे समाज में भी गांधीजी ने अन्तर्जातीय विवाह का समर्थन में स्त्री-पुरुष की समानता में विश्वास की बात रखी, कि स्त्रियों को भी पुरुषों के समान अधिकार मिलना चाहिए। हरिजन संस्करण महात्मा गांधी का महिलाओं के प्रति होने वाले अत्याचार की खिलाफत, मानवतावादी दर्शन, सत्य, अहिंसा, समानता और सेवा के सिद्धांतों पर आधारित है। महात्मा गांधी ने जातिवाद में अस्पृश्यता, भेदभाव और सामाजिक असमानताओं को मिटाने का प्रयास तथा उन्मूलन के लिए सामाजिक सुधार का आह्वान किया। उनके अनुसार, जब दो भिन्न जातियों के लोग विवाह करते हैं, तो वे जातिवाद की दीवारें तोड़ते हैं, क्योंकि यह व्यक्ति को सामाजिक बंधनों से मुक्त कर समानता और मानवता की स्थापना की दिशा में अग्रसर करता है। समाजशास्त्रीय दृष्टि से देखा जाए तो अन्तर्जातीय विवाह सामाजिक एकीकरण की प्रक्रिया को मजबूत करता है। गांधीजी के विचार समाजशास्त्री एमिल दुर्खीम के सामाजिक एकता सिद्धांत के समान ही हैं, जहाँ समाज के विभिन्न वर्गों के बीच एकता और सहयोग को आवश्यक माना गया। आज भारत में शिक्षा, शहरीकरण और कानूनी प्रावधानों हिंदू विवाह अधिनियम 1955 तथा विषे़ष विवाह अधिनियम 1954 के कारण अन्तर्जातीय विवाहों को बल मिला है। फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में जाति आधारित विरोध, सम्मान हत्याएँ और सामाजिक बहिष्कार जैसी समस्याएँ बनी हुई हैं। गांधीजी के समानता और स्वतंत्रता के विचारों ने स्वतंत्र भारत के नीति-निर्माताओं को प्रभावित किया जिसके अन्तर्गत विषेष विवाह अधिनियम 1954 के द्वारा ऐसे विवाहों को कानूनी संरक्षण भी दिया है। यह आलेख गांधीजी के मानवतावादी दर्शन को अन्तर्जातीय विवाह के माध्यम से सामाजिक और वैश्विक समानता के परिप्रेक्ष्य में विश्लेषित करता है तथा आधुनिक भारत में इन विचारों की प्रासंगिकता को भी रेखांकित करता है।
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Pages:68-71
How to cite this article:
विधि वर्मा, डॉ. मीरा सिंह "गांधीजी का मानवतावादी दर्शन और अन्तर्जातीय विवाहः वैश्विक समता की दिशा में एक कदम". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 7, Issue 4, 2025, Pages 68-71
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