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VOL. 7, ISSUE 4 (2025)
21वीं सदी में गुट निरपेक्ष आंदोलन और भारत
Authors
शशि कुमार, डॉ शेखर कुमार
Abstract
गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) शीत युद्ध के समय शुरू हुआ, जब दुनिया अमेरिका और सोवियत संघ जैसे दो ताकतों में विभाजित थी। इसका मुख्य लक्ष्य विकासशील देशों को एक साथ लाना था ताकि वे किसी भी ताकतवर देश के प्रभाव से बच सकें। भारत ने NAM को बनाने में मदद की और इसे एक खास सोच दी। अमेरिका, चीन और रूस जैसी ताकतें बढ़ रही हैं, जिससे NAM की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं। फिर भी, आतंकवाद, मौसम में बदलाव, आर्थिक असमानता और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर NAM की राय अभी भी जरूरी है। भारत की विदेश नीति, खासकर रणनीतिक स्वायत्तता, आज भी NAM की भावना को बनाए हुए है। हालाँकि भारत अब सिर्फ NAM तक ही सीमित नहीं है, बल्कि BRICS, SCO, G20 जैसे मंचों पर भी काम कर रहा है, फिर भी NAM उसके लिए विकासशील देशों से बात करने और सहयोग करने का एक जरूरी तरीका है। यह लेख 21वीं सदी में NAM की भूमिका, भारत के लिए इसका महत्व और भविष्य के बारे में बताता है। इस स्टडी से पता चलता है कि NAM उतना ताकतवर नहीं रहा, लेकिन फिर भी यह भारत के लिए दुनिया में शांति बनाए रखने और सभी के साथ न्याय करने का एक अच्छा तरीका है।
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Pages:61-63
How to cite this article:
शशि कुमार, डॉ शेखर कुमार "21वीं सदी में गुट निरपेक्ष आंदोलन और भारत". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 7, Issue 4, 2025, Pages 61-63
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