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VOL. 7, ISSUE 4 (2025)
झारखण्ड के रामगढ़ जिला में उराँव जनजाति की महिलाओं की सामाजिक स्थितिरू एक समग्र विश्लेषण
Authors
सुमन कुमारी, डॉ रश्मि
Abstract
झारखंड के रामगढ़ जिले सहित संपूर्ण क्षेत्र में उराँव जनजाति की महिलाओं की सामाजिक स्थिति ऐतिहासिक सशक्तिकरण और वर्तमान चुनौतियों के बीच एक जटिल समग्रता प्रस्तुत करती है। ऐतिहासिक रूप से, उराँव समाज में महिलाओं ने सामुदायिक नेतृत्व की एक सुदृढ़ परंपरा स्थापित की है, जिसका प्रमाण सिनगीदाई, चम्पू दई और कईली दई जैसी वीरांगनाओं के किस्सों से मिलता है, जिन्होंने योद्धा के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इस विरासत का प्रतीक आज भी उराँव महिलाओं द्वारा ललाट पर गोदने वाली तीन लकीरों वाला गोदना है . हालाँकि, वर्तमान समय में इन महिलाओं के सामने कई गंभीर चुनौतियाँ हैं। राजनीतिक क्षेत्र में उनका प्रतिनिधित्व पंचायत स्तर तक तो दिखता है, लेकिन उच्च सदनों में यह नगण्य है . समाज के भीतर ही डायन-बिसाही (डायन होने का झूठा आरोप) जैसी कुरीतियाँ आदिवासी महिलाओं को प्रमुख रूप से निशाना बनाती हैं. इसके अलावा, विस्थापन ने भी उराँव महिलाओं को विशेष रूप से प्रभावित किया है, जिसके कारण उन्हें बड़े शहरों में घरेलू नौकरानी का काम करने को मजबूर होना पड़ता है. इन चुनौतियों के बावजूद, शिक्षा के प्रसार, संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता और सामुदायिक एकजुटता के नए प्रयासों के माध्यम से उराँव महिलाओं में अपनी सामाजिक स्थिति को सुधारने और ऐतिहासिक गरिमा को पुनः प्राप्त करने की दिशा में बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं .
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Pages:25-28
How to cite this article:
सुमन कुमारी, डॉ रश्मि "झारखण्ड के रामगढ़ जिला में उराँव जनजाति की महिलाओं की सामाजिक स्थितिरू एक समग्र विश्लेषण". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 7, Issue 4, 2025, Pages 25-28
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