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VOL. 7, ISSUE 2 (2025)
पंडित नेहरु के समाजवादी चिंतन के विकास का प्राच्य और पाश्चात्य प्रभाव
Authors
डा. अखिलेश त्रिपाठी
Abstract
पण्डित नेहरू के ऊपर महात्मा गांधी के ‘साध्य और साधन की पवित्रता’ के सिद्धान्त का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा, इस तथ्य को पण्डित नेहरू स्वयं स्वीकार करते हैं। इस पुस्तक ने पण्डित नेहरू की आभ्यान्तरिक सम्वेदना को इतना झंकृत कर दिया कि अब पण्डित नेहर की एशिया और यूरोप की राजनीतिक परिघटना में गहरी अभिरुचि जागृत हो गयी। फलतः एशिया और यूरोप की राजनीतिक घटनाएं नेहरू जी को गहरे रूप में अनुप्राणित करने लगीं। पण्डित नेहरू ने इसी समय के फेबियन तथा अन्य समाजवादी सिद्धान्तों से सम्बन्धित ग्रन्थों का गहन अनुशीलन किया। फलतः समाजवाद के प्रति पण्डित नेहरू के मन मंे चंचल आकर्षण और जिज्ञासा क्रमशः बढ़ती गयी। राजनीतिक सिद्धान्तों के गहन अनुशीलन-मनन ने पण्डित नेहरू को तत्कालीन राजनीतिक आन्दोलन अब वैचारिक रूप से स्पन्दित करने लगे, इन आन्दोलनों के प्रति उनकी रूचि दिनों दिन बढ़ती गयी। नेहरू जी के चिन्तन के उद्भव में ब्रिटिश उदारवाद का अधिक योगदान रहा है। उदार समाजवादी, विकासवादी सिद्धान्त को मानते हैं। उदार समाजवादी वैधानिक साधनों के माध्यम से शासन व्यवस्था में परिवर्तन का पक्षपोषण करते थे। वे वैधानिक साधनों के माध्यम से समाजवादी समाज को प्रतिस्थापना करना चाहते थे।
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Pages:86-87
How to cite this article:
डा. अखिलेश त्रिपाठी "पंडित नेहरु के समाजवादी चिंतन के विकास का प्राच्य और पाश्चात्य प्रभाव". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 7, Issue 2, 2025, Pages 86-87
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