Logo
International Journal of
Sociology and Political Science
ARCHIVES
VOL. 7, ISSUE 1 (2025)
भारत में स्थानीय स्वशासी संस्थाओं के तीन दशक: एक अवलोकन
Authors
डॉ0 सपना
Abstract
भारतीय संघात्मक ढांचा एक बहुस्तरीय संघात्मक स्वरूप पर आधारित है, जिसमें स्थानीय स्तर पर पंचायती राज संस्थायें एवं नगरीय निकाय सम्मिलित हैं। विदित है कि 1 जून सन् 2023 को भारत में स्थानीय स्वशासी संस्थामों को लागू हुये तीन दशक पूरे हो गये। मगर स्थानीय स्तर पर, चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण, यह देखा जा रहा है कि इन संस्थाओं के क्रियाकलाप से लोग सन्तुष्ट नहीं हैं। संविधान के अन्तर्गत अनुच्छेद 243 (छ) एवं 273 (ब) के माध्यम से क्रमशः पंचायती राज संस्थानों एवं नगर निकायों को स्थानीय स्तर पर सामाजिक न्याय एवं आर्थिक-विकास हेतु योजनायें बनाने तथा उन्हें सम्पादित करने का दायित्व दिया गया है। मगर यह देखा जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर समस्यायें समाम्त होने का नाम ही नहीं ले रही है। आज भी बहुत सी ऐसी पंचायतें है, जिनका अपना स्थायी कार्यालय नहीं है, उनके पास अपने पंचायत सहायक नहीं है। वर्तमान डिजिटलीकरण के युग में अभी भी लगभग पचास प्रतिशत स्थानीय संस्थान कम्प्यूटर एवं इण्टरनेट कनेक्टीविटी की समस्या में जूझ रही हैं। इन बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि ये स्थानीय संस्थायें राजनीतिक सहभागिता, राजनीतिक समावेशन, राजनीतिक सामीजीकरण, एवं राजनीतिक एकीकरण के माध्यम से स्थानीय स्तर पर होने वाले सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक परिवर्तन की सहधर्मी बन कर उभरी हैं मगर ऐसे बहुत से कारक भी रहे हैं जो इन संस्थाओं की कार्यशीलता के मार्ग में बाधा बन कर उभरे हैं। ऐसी स्थिति में स्थानीय स्वशासी संस्थाओं का विगत 30 वर्षों से अधिक का सफर स्वयं में जिज्ञासापूर्ण बन जाता है।
Download
Pages:9-12
How to cite this article:
डॉ0 सपना "भारत में स्थानीय स्वशासी संस्थाओं के तीन दशक: एक अवलोकन". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 7, Issue 1, 2025, Pages 9-12
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.