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VOL. 6, ISSUE 1 (2024)
ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभाव एवं उपाय
Authors
डॉ. पुष्पा देवांगन
Abstract
ध्वनि एक अदृश्य जहर है जो हर पल हमें जाने-अनजाने में लगातार हानि पहुंचाता रहता है। एक निश्चित मात्रा में शोर न केवल कान, हृदय पैर एवं दिमाग को रूग्ण करता है अपितु पारिवारिक जीवन एवं सामाजिक जीवन पर कुप्रभाव भी डालता है। ध्वनि मानव जीवन को विभिन्न रूपों में प्रभावित करता है शोर जहां एक ओर मानव स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव डालता है, वहीं दूसरी ओर उसकी कार्यक्षमता भी घटाता है। जो लोग अधिक शोर के आसपास रहतें हैं उनमें आत्महत्या करने की प्रवृत्ति अधिक पाई जाती है। इसके साथ-साथ ये लोग हृदय रोग से पीड़ित भी पाये जाते हैं। जिन स्थानों पर शोर अधिक होता है वहां पर रहने वाले लोगों में अपराध प्रवृत्ति अधिक पाई जाती है। यदि समय रहते ध्वनि प्रदुषण को नियंत्रित नही किया गया तो मानव जाति को गंभीर शारीरिक समस्या उत्पन्न हो जायेगी। अतः सरकार को ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिये कठोर कानून बनाना चाहिए।
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Pages:66-68
How to cite this article:
डॉ. पुष्पा देवांगन "ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभाव एवं उपाय". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 6, Issue 1, 2024, Pages 66-68
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