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VOL. 5, ISSUE 2 (2023)
संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की भूमिका
Authors
राजवीर
Abstract
संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को की गई। संयुक्त राष्ट्र के गठन का श्रेय अमेरिका के राष्ट्रपति रूज्वेल्ट, रूस के राष्ट्रपति जोसफ स्टालिन एवं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल को जाता है। 26 जून 1945 को अमेरिका के प्रसिद्ध नगर सैन फ्रांसिस्को में एक सम्मेलन हुआ और इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ के गठन की नींव पड़ी। इस सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के उद्देष्य एवं कार्य के संदर्भ मंे एक घोषणा पत्र तैयार किया गया, इस घोषणा पत्र पर 51 राष्ट्रों के प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षर करके 24 अक्टूबर1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापित किया गया। इस समय संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों की संख्या 193 है। संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) में है।
राजनीतिक स्वतंत्रता और रंगभेद स्वतंत्र भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी सदस्यता को अंतराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने की एक महत्वपूर्ण गारंटी के रूप में देखा। भारत औपनिवेषिक देषों और कौमो को आजादी दिए जाने के संबंध में संयुक्त राष्ट्र की एंतिहासिक घोषणा 1960 का सह-प्रायोजक था जो उपनिवेषवाद के सभी रूपों ओर अभिव्यक्तियों को बिना शर्त समाप्त किए जाने की आवष्यकता की घोषणा करती है। भारत राजनीतिक स्वतंत्रता समिति की समिति का पहला अध्यक्ष भी निर्वाचित हुआ था जहां उपनिवेषवाद की समाप्ति के लिए उसके अनवरत प्रयास रिकार्ड पर है। भारत दक्षिण अफ्रिका में रंगभेद और नस्लीय भेदभाव के सर्वाधिक मुखर आलोचको में से था वस्तुत भारत संयुक्त राष्ट्र (1946 में) में इस मुद्दे का उठाने वाला देश था और रंगभेद के विरूद्ध आम सभा द्वारा स्थापित इन समित के गठन में अग्रणी भूमिका निभाई थी। जब 1965 में सभी प्रकार के नस्लीय भेदभाव के उन्मुल से सबंधित कन्वेंषन पारित किया गया था, भारत सबसे पहले हस्ताक्षर करने वालों में शामिल गुट-निरपेक्ष आंदोलन और समूह-77 के संस्थापक सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था में भारत की हेसियत विकासषील देषों के सराकारों और आकांक्षाओं तथा अधिकाधिक न्यायसंगत अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक एवं राजनीतिक व्यवस्था की स्थापना के अग्रणी समर्थक के रूप मजबूत हुई।
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Pages:35-37
How to cite this article:
राजवीर
"संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की भूमिका". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 5, Issue 2, 2023, Pages 35-37
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