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VOL. 5, ISSUE 2 (2023)
मानव की अवधारणा एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में मानव-निर्माण के तत्व
Authors
डॉ. विवेक कुमार राय, प्रद्युम्न पाण्डेय
Abstract
दीनदयाल जी एक एकात्म मानव का निर्माण करना चाहते थे। उनका जोर मानव के सर्वांगीण विकास पर था क्योंकि वे उसे खण्ड खण्ड में नही अपितु उसकी समग्रता में देखते थे। पश्चिमी विचार चिंतन में इस तरह की दृष्टि का अभाव पाया जाता है। वहां मनुष्य को उसकी समग्रता में न देखकर उसके किसी एक पक्ष विशेष पर जोर दिया जाता रहा है। अरस्तू ने मनुष्य को सिर्फ एक सामाजिक प्राणी मानते हुए उसके अन्य पक्षों को उपेक्षित कर दिया है। इसी तरह सिगमंड फ्रायड मनुष्य में काम तत्व की ही प्रधानता को स्वीकार करते हैं। एडम स्मिथ ने आर्थिक मानव की संकल्पना दी तथा हर्बर्ट साइमन ने प्रशासनिक मानव का सिद्धांत दिया। इनमें से किसी भी विचारक ने मनुष्य को उसकी समग्रता में नही देखा। जबकि भारतीय विचार परंपरा में मनुष्य को उसके समग्र रूप में स्वीकार किया जाता है। मनुष्य के लिए धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष-चारों पुरुषार्थों को बराबर महत्व दिया गया है। दीनदयाल जी इसी को आधार बनाकर एकात्म मानव का निर्माण करना चाहते हैं।
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Pages:21-24
How to cite this article:
डॉ. विवेक कुमार राय, प्रद्युम्न पाण्डेय "मानव की अवधारणा एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में मानव-निर्माण के तत्व". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 5, Issue 2, 2023, Pages 21-24
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