ARCHIVES
VOL. 5, ISSUE 1 (2023)
भारत और श्रीलंका के सम्बन्ध में प्रवासी भारतीयों की समस्याः एक अध्ययन
Authors
सुनीता बघेल
Abstract
भारत और श्रीलंका में मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध होने पर भी समय-समय पर कुछ घटनाएं घटित होती रही हैं जिससे दोनों देशों के बीच मतभेद उभरकर सामने आये। भारतीय प्रवासियों की समस्या भारत और श्रीलंका के मध्य विवाद का प्रमुख मसला भारतीय प्रवासियों को लेकर उत्पन्न हुआ। श्रीलंका के अधिकांश प्रवासी भारतीय चाय और रबड़ की खेती पर काम करवाने के लिए लाये गये थे। ये श्रमिक सस्ते थे और इनमें से अधिकांश दक्षिण भारत से ले जाये गये थे। 1948 में श्रीलंका के स्वतन्त्र होने तक यह ब्रिटिश नागरिकों के रूप में समान अधिकारों एवं मताधिकार का लाभ उठाते थे परन्तु शीघ्र ही 1948 के सीलोन नागरिकता अधिनियम एवं सीलोन संसदीय अधिनियम (1949) के द्वारा इन्हें मताधिकार से वंचित कर दिया गया। नागरिकता प्राप्त करने के लिए उन्हें यह प्रमाणित करना पड़ता था कि उनके माता-पिता या वे स्वयं श्रीलंका में जन्मे थे और 1939 से लगातार श्रीलंका में ही निवास कर रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण श्रीलंका में आर्थिक दबाव अनुभव होने लगा था और सिंहली लोग चाहते थे कि प्रवासी भारतीय यहां से चले जायें तो उनको रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त होने लगें।
Download
Pages:105-107
How to cite this article:
सुनीता बघेल "भारत और श्रीलंका के सम्बन्ध में प्रवासी भारतीयों की समस्याः एक अध्ययन". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 5, Issue 1, 2023, Pages 105-107
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.

