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VOL. 5, ISSUE 1 (2023)
मध्यप्रदेश के अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में कुपोषण से संबंधित योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रभाव का अध्ययन
Authors
रिनू गोठी
Abstract
इस प्रस्तुत शोध आलेख में मध्यप्रदेश के अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में और मध्यप्रदेश के विशेष पिछड़ी जनजाति समूहों के भीतर कुपोषण से संबंधित सरकार की योजनाओ एवं समय-समय पर प्रयोजित कार्यक्रमों के प्रभावों का अध्ययन करने पर खास ध्यान में रखते हुए आलेख के मुख्य दो उद्देश्यों पर शोध अध्ययन केन्द्रित है-क) मध्यप्रदेश के अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में कुपोषण का अध्ययन करना ख) मध्यप्रदेश के अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में कुपोषण से संबधित योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रभाव का अध्ययन करना है। इस शोध चयन उद्देश्य के पीछे की पृष्ठभूमि में कुपोषण के स्थिति को सभी राज्यों की दृष्टि से विश्लेषण किया जाये तो मध्यप्रदेश भारत का दूसरा राज्य है। यहां की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार कुल सात करोड़ 26 लाख 26 हजार 809 है। जिसमें 5 करोड़ 25 लाख 57 हजार 404 ग्रामीण आंचलिक क्षेत्रां की जनसंख्या है। इस बड़ी जनसंख्या के समूहों में मध्यप्रदेश की जनजातियों का प्रथम स्थान है जो जंगल के बीच पहाड़ियों, घाटियों में शहर से दूर बसा हुआ है। शोध प्रविधि में शोध आकड़ो के संचयन हेतु द्वितीयक आकड़ो का संग्रहण शासन द्वारा प्रकाशित प्रतिवेदनो को संदर्भित करते हुए विश्लेषण का आधार बनाते हुए मध्यप्रदेश के जनजातीय कुपोषण की स्थिति पर उक्त उद्देश्यों को प्राप्त किया गया है। जिसके माध्यम से कुपोषण की स्थिति को कोरकु जनजाति के विशेष संदर्भ में अध्ययन को संपन्न किया गया है। इस शोधकार्य विधि की परिसीमाएं मध्यप्रदेश के जनजातीय कुपोषित बच्चो महिलाओं तक सीमांकित किया गया है। जो कि संबंधित योजनाओं और प्रयोजित कार्यक्रमों के प्रभावित परिणामों को विस्तृत विश्लेषणात्मक उल्लेख को शोध आलेख में आगे किया गया है। प्रस्तुत शोध के परिलक्षित निष्कर्षो की प्रासंगिकता में यह सार्थक शब्दो में कहा जा सकता है कि केन्द्र व मध्यप्रदेश शासन द्वारा चलाये जा रहे कुपोषण संबंधित योजनाओं और प्रायोजित कार्यक्रमों का प्रभावी परिणाम में सार्थकता है।
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Pages:102-104
How to cite this article:
रिनू गोठी "मध्यप्रदेश के अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में कुपोषण से संबंधित योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रभाव का अध्ययन". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 5, Issue 1, 2023, Pages 102-104
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