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VOL. 5, ISSUE 1 (2023)
पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मुख आने वाली समस्याऐं (मध्यप्रदेष के सागर जिले के विषेष संदर्भ में)
Authors
राजेन्द्र सूर्यवंषी
Abstract
महिला जनप्रतिनिधि द्वारा ही ग्रामीण विकास की बात करने के पीछे यह तर्क है कि भारत में महिलाओं की संख्या भी काफी है, अतः इतनी बड़ी जनशक्ति के लिये उन्हें जनप्रतिनिधि बनाना आवश्यक है। महिलाओं के जनप्रतिनिधि बनने से उनकी झिझक और घबराहट दूर होगी तथा उनमें आत्मनिर्भरता का विकास होगा, साथ ही आत्मबल में वृद्धि होगी। यह सत्य है कि अभी भी महिलाएँ सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक दृष्टि से पिछड़ी हुई है। अतः उनकी उन्नति हेतु उन्हें आगे लाकर उन पर जिम्मेदारी डालना आवश्यक है। इस पहलू से विकास के तर्क पर प्रकाश डाले तो हम पाते हैं कि महिलाएँ स्वयं कई दृष्टियों से पिछड़ी एवं लज्जाशील होती हैं, अतरू विकास संबंधी जागरूकता को लेकर लोग उन्हें संशय की दृष्टि से देखते हैं। ग्रामीण विकास के लिये विकास कार्यों की योजना बनाना, कार्यस्थल का दौरा करना, भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों से निपटना तथा विकास कार्यों की तकनीकी जानकारी रखना आदि महिलाओं हेतु उचित एवं योग्य कार्य नहीं माने जाते। राजनीति एवं विकास संबंधी कार्यों की जिम्मेदारी लेने से उनकी स्वयं की जिम्मेदारियाँ जैसे- बच्चे का पालन एवं पारिवारिक दायित्व संभालने आदि में समस्याऐ आएगी।
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Pages:66-68
How to cite this article:
राजेन्द्र सूर्यवंषी "पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मुख आने वाली समस्याऐं (मध्यप्रदेष के सागर जिले के विषेष संदर्भ में)". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 5, Issue 1, 2023, Pages 66-68
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