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International Journal of
Sociology and Political Science
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VOL. 5, ISSUE 1 (2023)
भारतीय दलित आंदोलन मे डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका
Authors
संतोष कुमार, डॉ. रअफत अफरोज
Abstract
डॉ. बाबा साहब भीमराव आंबेडकर भारतीय इतिहास के प्रमुख व्यक्तियों में से एक थे। जिन्होंने उपेक्षितों, शोषितों, दलितों, पिछड़ों, पीड़ितों में सम्मानपूर्वक जीने की ललक जगाई। हज़ारों सालों से हो रहे शोषण और दमन के कारण, मानसिक रूप से मृत पड़ी जमात के मन में अपने अधिकारों के प्रति जो बिगुल फूका था, वह कारवां बनकर निरंतर बढ़ता जा रहा है। भारत देश को आज़ादी प्राप्त होने के बाद उन्होंने कहा था, ‘‘हम ऐसे समय में प्रवेश कर रहें हैं, जिसमें हम राजनैतिक रूप से तो बराबर हैं, लेकिन सामाजिक रूप से बराबर नहीं है।’’ उनकी यह बात आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उस समय थी। जातिवादी ज़हर ने हमारे भारतीय समाज को बुरी तरह जकड़ लिया है। इस कारण दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों पर आए दिन अत्याचार होता रहता है, जिसके कारण एक बड़ी जनसंख्या ज़िल्लत की ज़िंदगी जीने के लिए अभिशप्त है। डॉ. बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने भारतीय समाज.व्यवस्था का गहन अध्ययन किया और उन्होंने पाया कि भारत को कमज़ोर बनाने, इसकी विकास की धारा अवरुद्ध करने तथा सामाजिक सौहार्द्र में सबसे बड़ी बाधा भेदभावपूर्ण जाति.व्यवस्था ही है। उनके समय देश में जातिप्रथा, जिसका सबसे अमानवीय रूप छुआछूत था, आज से कहीं अधिक विद्यमान थी। आज आज़ादी के 70 साल बाद भी, वह कुछ पुराने रूप में और कुछ रूप बदलकर हमारे समाज में मौजूद हैं। जाति-व्यवस्था के रूप में, भारतीय समाज में शोषण को सामाजिक और धार्मिक मान्यता प्राप्त रही है, जिसे बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर ने भी स्वयं भी भोगा था। इसलिए उन्होंने इस अमानवीय व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई अपने जीवन भर जारी रखी। भारतीय जाति व्यवस्था को समझने और उसके उन्मूलन के लिए उनकी पुस्तकें अछूत कौन और कैसे, शूद्रों की खोज, काँग्रेस और गांधी ने अछूतों के लिए क्या किया, जातिभेद का बीज आदि प्रमुख हैं। इन पुस्तकों में उन्होंने बताया कि जातिभेद की नींव में धार्मिक ग्रंथ हैं, जिनको सामाजिक मान्यता प्राप्त है। सामाजिक क्रांति के उद्देश्य से ही उन्होंने धार्मिक.सामाजिक कानून की किताब मनुस्मृति को 25 दिसम्बर, 1927 को अपने समर्थकों के साथ मिलकर दहन किया। उन्होंने कहा मनुस्मृति अस्पृश्यों और महिलाओं की सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक दासता का एक मुख्य कारण है।
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Pages:38-40
How to cite this article:
संतोष कुमार, डॉ. रअफत अफरोज "भारतीय दलित आंदोलन मे डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 5, Issue 1, 2023, Pages 38-40
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