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VOL. 4, ISSUE 2 (2022)
समाज सुधाकर के रूप: गाँधी जी
Authors
डॉ. प्रमिला वास्केल
Abstract
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में रह कर ही मनुष्य का विकास संभव है। समाज के विकास को विकसित करने में कई विद्ववानों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसमें महात्मा गाँध्ाी का विशेष स्थान रहा। महात्मा गाँध्ाी जी का राजनीतिक व आर्थिक विचारों के साथ-साथ सामाजिक सुध्ाार के क्षेत्र में भी उनके विचारोें और कार्यो का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। गाँध्ाी जी आध्ाुनिक समाज तथा राज्य के स्थान पर एक अन्य नवीन समाज की स्थापना करना चाहते थे, जो कि उनकी नजर में आदर्श समाज था। अंिहंसा पर आध्ाारित इस समाज में सरकार का रूप क्या होगा, उसको निश्चित करने का अध्ािकार वे जनता पर ही छोड़ देना चाहते थे। गांध्ाी जी के अनुसार ‘‘अहिंसा पर आध्ाारित समाज में सरकार की रूपरेखा क्या होगी, मैं जानबूझकर इसे वर्णन नहीं कर रहा हूँ जब समाज अहिंसा नियम के अनुसार स्वयं बन जाएगा तो उसका रूप आज के समाज के रूप में पूर्णतया अलग होगा, परंतु मैं इस बात को पहले से ही नहीं बतला सकता कि पूर्णरूप से अहिंसा पर आध्ाारित सरकार कैसी होगी।‘‘ गांध्ाी जी के द्वारा समाज में व्याप्त अस्पृश्यता निवारण और सामाजिक समानता की स्थापना के पिछे एक अनोखा दर्शन है। जिसके अंतर्गत छुआ-छूत मानने वालों को प्रायश्रित का मार्ग दिखाया जिन लोगो के साथ भेद-भाव किया जाता है उनको समानता के स्तर पर लाने का प्रयास कर एकता स्थापित करने का भाव उत्पन्न होना चाहिए। महात्मा गांध्ाी जी ने राजनैतिक आजादी के साथ-साथ सम्पूर्ण सामाजिक समता की स्थापना का लक्ष्य भी सामने रखा। उन्होंने देखा कि भारत गुलाम क्यो बना इसके कारणो की खोज की और पाया कि भारत में जाति भेद-भाव, सामाजिक अन्याय, छूआ-छूत, महिलाओं की निम्न स्थिति आदि अनेक कारण है जिससे हमारा समाज कमजोर बना। इन सभी कारणांे के निराकरण हंेतु गांध्ाी जी ने विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों संचालित कर एक सामाजिक सुध्ाार के रूप अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गांध्ाी जी के द्वारा समाज सुध्ाार एवं समाज के विकास के लिए विभिन्न आंदोलन चलाये जिसमें सामा्रज्यवाद, जातिवाद, सम्प्रदायवाद आदि का भरसक विरोध्ा किया गया। गांध्ाी जी के द्वारा समाज सुध्ाार के लिए चलाये गये आंदोलन का वर्तमान में अनुकरणी व प्रासंगिक महत्व है। प्रस्तुत शोध्ा पत्र द्वितीयक आंकडो पर आधारिकत है जिसमें गांध्ाी जी के समाज सुध्ाारक विचारों को बताने का प्रयास किया गया है।
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Pages:41-48
How to cite this article:
डॉ. प्रमिला वास्केल "समाज सुधाकर के रूप: गाँधी जी". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 4, Issue 2, 2022, Pages 41-48
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