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International Journal of
Sociology and Political Science
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VOL. 4, ISSUE 1 (2022)
महिला सुरक्षा में मोबाइल ऐप की भूमिकाः एक अवलोकन
Authors
डॉ. सुनीता पारीक, डॉ. संजय कुमार
Abstract
महिलाएं जो की देश की आबादी का आधा हिस्सा है, देश की अर्थव्यवस्था और राजनीति में बराबर की भागीदारी रखती हैं, परंतु बराबर की भागीदारी रखते हुए भी डर और भय के माहौल में अपने आप को कई बार अकेला होने की स्थिति में संकट की अवस्था में पाती है, ऐसे में डर और भय का माहौल तथा संकट में फंसी किसी भी महिला या युवती को तुरन्त उसी वक्त किसी भी प्रकार के सहायता पुलिस द्वारा या परिवारजनों द्वारा न मिलने से उस महिला या युवती के साथ दुर्घटना होने की संभावना रहती है। एक तरफ जहां हम भारत विकास तथा आधुनिकीकरण की दौड़ में शामिल होकर महिला विकास तथा महिला सुरक्षा का दावा ठोकते हैं वहीं एक कड़वा सच यह भी है कि आज भी महिला सुरक्षा को लेकर और अधिक कोशिशें करने की जरूरत है। जब महिला या बच्ची घर से बाहर निकलती है तो कदम कदम पर गहरा डरावना साया कभी भी कहीं भी उसका पीछा कर सकता है। घर से लेकर गली के नुक्कड़ तक होते हुए ऑफिस तक, सड़क पर, बस में, रेल में मेट्रो में, बस अड्डे पर रेलवे स्टेशन पर, मॉल में ,कहीं भी किसी भी कोने में, यह डर का साया उन्हें घेरने की कोशिश करता है। संकट में फंसी बच्चियां या महिला को सरकार और पुलिस विभाग द्वारा महिलाओं को तुरंत सहायता पहुंचाने हेतु मोबाइल एप द्वारा पुलिस विभाग और उनके परिवार जनों को तुरंत संकट की स्थिति की सूचना प्राप्त होने से तथा महिला को सहायता पहुंचाने हेतु काफी मददगार साबित हो रहा है। महिला सुरक्षा हमेशा हर सरकार की प्राथमिकता रहती हैं। अब सरकारों के साथ-साथ दिल्ली पुलिस ने भी महिला सुरक्षा को लेकर अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। और विभिन्न राज्यों में सरकार और पुलिस के द्वारा मोबाइल ऐप के हेल्प के माध्यम से तुरंत महिलाओं को संकट की स्थिति में सहायता पहुंचाने के उद्देश्य को पूरा किया जा रहा है और इसमें काफी हद तक पुलिस तथा सरकार को कामयाबी भी मिली है। आज के डिजिटल युग में अपराध करने के तरीके बहुत ही शातिर हो गए हैं, जहां कई बार महिला को भनक भी नहीं लग पाती कि अपराधी उसका लगातार पीछा कर रहा है। हम कह सकते हैं कि किसी भी बुरी घटना के लिए तीन मुख्य तत्व महत्वपूर्ण हो सकते हैं एक तो अपराधी खुद, दूसरा शिकार होती महिला या बालिका और तीसरा हमला करने का मौका या अवसर। इसमें से एक भी तत्व का तालमेल न बैठे तो हादसा टल सकता है।¹ अतः अपराधी के शिकंजे में फंसने से पहले ही अलर्ट होकर कोई भी महिला या युवती अपने परिवारजनों और पुलिस की सहायता से इन मोबाईल एप के द्वारा, जो की विभिन्न विभिन्न राज्यों में महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए लांच किए जाते रहे हैं, ऐसे किसी भी बुरी घटना से बच सकती है। आज के समय में जब हम महिला समानता का दावा ठोकते है, कोई भी युवती या महिला सिर्फ और सिर्फ अपनी प्रगति का रास्ता इस बात से नहीं रोक सकती कि बाहर जाने पर उसकी सुरक्षा को खतरा है क्योंकि अगर ऐसा ही चलता रहा तो महिला प्रगति की बात करना बेमानी होगा। आज के समय में मोबाइल हम सबके पास होता है, वही मोबाइल हमारी सुरक्षा को पुख्ता कर सकता है। महिला की प्रगति को रोकने के बजाय उसके हाथों में जो मोबाइल होता है, उसी में डाउनलोड किए ऐप से महिला सुरक्षा को पुख्ता बनाना ज्यादा प्रभावी साबित बनाने के कोशिश हो रही है। अतः वर्तमान में सरकार और पुलिस की मदद से लांच किए जा रहे यह विभिन्न ऐप महिला सुरक्षा को लेकर मददगार साबित हो रहे हैं। प्रस्तुत लेख में महिला सुरक्षा हेतु विभिन्न राज्यों में लॉन्च किए गए इन एप की जानकारी दी जाएगी और किस प्रकार से इनसे महिला सुरक्षा में मदद मिली है और कैसे महिलाएं इनका प्रयोग कर खुद को शिकार होने से बचा सकती है। और इसमें पुलिस और प्रशासन की क्या भूमिका रही है इसका विश्लेषण किया जाएगा।
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Pages:69-72
How to cite this article:
डॉ. सुनीता पारीक, डॉ. संजय कुमार "महिला सुरक्षा में मोबाइल ऐप की भूमिकाः एक अवलोकन". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 4, Issue 1, 2022, Pages 69-72
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