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International Journal of
Sociology and Political Science
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VOL. 4, ISSUE 1 (2022)
भारत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता का एक विष्लेष्णात्मक अध्ययन
Authors
ममलेश कुमावत
Abstract
इस प्रस्तुत शोध आलेख में महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता का अध्ययन किया गया है, जिस तरह महिला की सहभागिता के बिना एक परिवार की इकाई की कल्पना करना बमुष्किल ही नहीं बेबुनियाद भी है। इससे स्पष्ट होता है कि महिलाओं का न केवल प्रतिनिधिक सहभागिता/उदारता की जरूरत है बल्कि अहं निर्णय लेने में उनकी भूमिका का भागीदारी की सुनिष्चितता में मानव सभ्यता के विकास की परिधि केन्द्र है। इसलिए इस शोध-पत्र में सामाजिक सहभागिता, आर्थिक सहभागिता, सांस्कृतिक सहभागिता, धार्मिक सहभागिता के अलावा राजनीतिक सहभागिता का दुनिया में महिलाओं की भागीदारी की वैसी स्थिति नहीं है, जिस तरह की पुरूष के साथ कंधा से कंधा मिलाकर अपनी भागीदारी को चुनौती देती है। एक तरफ़ पुरूष-प्रधान सभ्यता, पुरूषों की राजनीतिक व्यवस्था में कभी स्त्रियों के अहंकार को अन्य व्यवस्था सहभागिता की तुलना में राजनीतिक सहभागिता के रूप में कभी भी उनका स्वभाविक पक्ष रखने के लिए कभी भी काबिल नहीं समझा। ‘‘इतिहास में कभी स्त्रियों का धर्म नहीं है, न ही कोई कोरी कल्पना है‘‘। यदि कुछेक अपवाद को छोड़ दिया जाये तो महिलाएं पूरी दुनिया से उपेक्षित होने का इतिहास गवाह है। भारतीय संविधान अनोख़ा उदाहरण प्रस्तुत करता है। पष्चिमी देषों ने महिलाओं को अधिकारों से वंचित रखा। आज संविधान में सभी प्रभुत्व मौलिक अधिकार प्राप्त हों भले ही परिवार की इकाई हैं। लेकिन उन्हें निर्णय की सहभागिता में पंच-पंचायतों के निर्णयों से अलग-थलग हैं, इसके उदाहरण को संविधान सभा में महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता को देख़ा जा सकता है। जबकि 17वीं लोक सभा में 14 प्रतिषत महिलाए ही संसद में पहुँच सकी है।
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Pages:44-46
How to cite this article:
ममलेश कुमावत "भारत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता का एक विष्लेष्णात्मक अध्ययन". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 4, Issue 1, 2022, Pages 44-46
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