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VOL. 4, ISSUE 1 (2022)
मध्यप्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर में महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता पर अम्बेडकर का प्रभाव
Authors
ममलेश कुमावत
Abstract
अम्बेडकर का मानना था कि सही अर्थो में मैं किसी भी देश की प्रगति को इस पैमाने पर परखता हूँ कि उस देश में महिलाओं की स्थिति क्या है। सही अर्थो में प्रजातंत्र तभी आयेगा। जब महिलाओं को पिता की पैतृक सम्पत्ति में पुत्रों के बराबर हिस्सा मिलेगा। उन्हें पुरूषों के समान अधिकार मिलेगे। महिलाओं की प्रगति तभी होगी जब उन्हें परिवार समाज में दोएम दर्जे का न माना जाये। शिक्षा पर पहंुच और आर्थिक उन्नति महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता साकार हो सकेगी। 5 फरवरी 1951 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने भारतीय संसद में हिन्दू कोड बिल पेश किया था। इसका उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक शोषण व अत्याचार से मुक्त कराना और पुरूषों के बराबरी पर लाकर खड़ा करना था। महिला सश्क्तीकरण व राजनीतिक सहभागिता के क्षेत्र में इस ऐतिहासिक पहल से आज शायद ही बहुत अधिक लड़किया रूबरू हागी। इन सभी को जानने समझने की जरूरत है कि इसे हिन्दू कोड बिल में महिला सशक्तीकरण की व्याख्या निहित है। इसके पहले धार्मिक मान्यताओं पराम्पराओं रीतिरिवाजों में महिलाओं के अधिकारों को लेकर विभिन्न मत थे। एक मत यह था कि स्त्री धन विद्या और शक्ति की देवी है। मनुसंहिता में लिखा है ‘‘यत्र नारियस्ति पुजन्ते तत्र देवता रमन्ते‘‘ अर्थात् जहां नारी की पूजा होती है वहां देवताओं का निवास होता है। दूसरी ओर ऋग्वेद में बेटी के जन्म को दुखों की खान और बेटे को नभ की ज्योति के समतुल्य माना गया है। ऋग्वेद में ही नारी के मनोरंजन कारी भोग्या रूप का वर्णन किया गया है एवं नियोग प्रथा को भी पवित्र कार्य का दर्जा दिया गया है। इस प्रकार से कहा जा सकता है कि ब्राह्मण धर्म शास्त्रों में स्त्रियों के शोषण का वर्णन मिलता है यह कोई अकेला उदाहरण नहीं है यह सभी धर्मों में महिलाओं की उपेक्षा से धर्मशास्त्र भरा पड़ा है।
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Pages:47-49
How to cite this article:
ममलेश कुमावत "मध्यप्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर में महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता पर अम्बेडकर का प्रभाव". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 4, Issue 1, 2022, Pages 47-49
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