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VOL. 4, ISSUE 1 (2022)
सामाजिक न्याय की गतिशीलता में आरक्षण का योगदानः एक विवरणात्मक अध्ययन
Authors
सुभाष चन्द्र वर्मा
Abstract
आधुनिक राज्यों के आधिपत्य में सभी मानव समाजों में रहते हैं। राज्यों में सभी नागरिकों को नागरिक अधिकार, मानवाधिकार, मौलिक अधिकार ये सभी सामूहिक रूप से मिले हुए हैं। जिससे व्यक्तियों को ‘कानून के शासन‘ के आधार पर स्वतंत्रता एवं गरिमा की रक्षा हो सके। समान अवसर और संसाधनों के बटवारे में उचित प्रक्रिया का पालन हो। परिणामस्वरूप समाज में सामाजिक न्याय की प्रतिध्वनि न सिर्फ सुनाई दे बल्कि दिखाई भी दे। आरक्षण इसी सामाजिक न्याय की स्थापना व गतिषीलता में एक मजबूत स्तम्भ का कार्य करता है। शोध आलेख में गतिषीलता का तात्पर्य-योजनाओं व प्रावधानों में अन्तर्निहित बल से है। जिसके द्वारा कोई योजना व प्रावधान संबंधित समूहों पर अपना प्रभाव छोड़ सके। सामाजिक न्याय की संकल्पना में असमान परिस्थितियों के मुद्दें जैसे असमानता और वंचना को हल किये बिना कोई समाज न्यायपूर्ण नहीं हो सकता। यह नैतिक सहजबोध पर आधारित है। भारत में आभावों और असामानताओं जैसे मसलो से सर्वाधिक प्रभावित अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां है। इन्हें सामाजिक न्याय की क्यों जरूरत है, इस आलेख में प्रतिबिंबित किया गया है।
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Pages:37-39
How to cite this article:
सुभाष चन्द्र वर्मा "सामाजिक न्याय की गतिशीलता में आरक्षण का योगदानः एक विवरणात्मक अध्ययन". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 4, Issue 1, 2022, Pages 37-39
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