Logo
International Journal of
Sociology and Political Science
ARCHIVES
VOL. 4, ISSUE 1 (2022)
महात्मा गाँधी की सतत प्रासंगिकता
Authors
शिव हर्ष सिंह
Abstract
प्रस्तुत लेख में लेखक ने महात्मा गांधी की सतत प्रासंगिकता का विवेचन एवं विश्लेषण किया है द्य दुनियाभर के तमाम लोग गांधी रजी को एवं उनके विचारों को एक ऐतिहासिक कालखंड में सीमित करते हैं द्य यहाँ पर लेखक ने यह दर्शाया है कि वैसे तो आत्मनिर्भर गाँव,औद्योगीकरण और आधुनिकता के विरोध तथा कामुकता और लैंगिकता सम्बन्धी गांधीवादी विचार वर्तमान परिदृश्य में कुछ ख़ास महत्व के नहीं हैं और लगभग अप्रासंगिक हो चुके है परंतु अहिंसा, अस्मिता, बहुसंस्कृतिवाद, राष्ट्रवाद विषयक गंधी जी के विचर आज भी अत्यधिक समीचीन एवं प्रासंगिक हैं और आगे भी समीचीन और प्रासंगिक रहेंगे। इसके अतिरिक्त, सत्य और अहिंसा पर आधारित गंधी जी की जीवनशैली, उनकी नैतिक-पारदर्शिता तथा निर्भीकता और प्रायोगिक -जीवन्त्तता मानवता को चिरकाल तक प्रेरित करती रहेगी।
Download
Pages:6-8
How to cite this article:
शिव हर्ष सिंह "महात्मा गाँधी की सतत प्रासंगिकता ". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 4, Issue 1, 2022, Pages 6-8
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.