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International Journal of
Sociology and Political Science
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VOL. 3, ISSUE 2 (2021)
कृषि व्यवस्था के संबंध में समाजवादी अवधारणा
Authors
अखिलेश त्रिपाठी
Abstract
आर्थिक क्षेत्र में न्याय और सम्पन्नता ही समाजवाद का लक्ष्य है। न्याय की सार्थकता सम्पन्नता पर निर्भर करती है और भारत में सम्पन्नता उद्योग तथा कृषि पर आधारित है। चूँकि उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चे माल की पूर्ति कृषि से होती है। अतः कृषि विकास पर ही आर्थिक सुदृढ़ता निर्भर है। लेकिन वास्तविकता यह है कि भारतीय कृषि इतनी पिछड़ी हुई है कि खाद्यान्न की दृष्टि से भारत आत्मनिर्भर नहीं है। यद्यपि खेती के ऊपर सम्पूर्ण देश एवं सरकार का ध्यान गया है क्योंकि जब तक भारत की कृषि व्यवस्था का विकास नहीं होगा तब तक वास्तविक अर्थों में भारत का विकास नहीं हो सकता। देश में अधिकांश लोगों को संतुलित और पूर्ण भोजन नहीं मिलता और कुछ प्रतिशत जन संख्या तो वास्तविक जीवन स्तर से नीचे अपना जीवन गुजार रही है। कृषि के पिछड़ेपन के कारणों पर डाॅ0 लोहिया ने दृष्टिपात करते हुए पंचवर्षीय योजनाओं को और उनको क्रियान्वित करने के तरीको को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि तकाबी बांटने की नीति भी असफल हुई है, क्योंकि उनका क्रियान्वयन इस प्रकार होता है कि गरीब किसान तकाबी बांटने में लगे हुए कर्मचारियों द्वारा अच्छी तरह शोषित कर लिया जाता है।
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Pages:70-72
How to cite this article:
अखिलेश त्रिपाठी "कृषि व्यवस्था के संबंध में समाजवादी अवधारणा ". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 3, Issue 2, 2021, Pages 70-72
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