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VOL. 3, ISSUE 2 (2021)
भारतीय विदेश नीति में वर्ष 1990 के बाद आए परिवर्तनों का संक्षिप्त अध्ययन
Authors
Ashutosh Singh
Abstract
अधिकांश देश और उस पर भी बड़े ताकतवर देश आसानी से अपनी अंतर्राष्ट्रीय नीति को नहीं बदलते हैं। सरकारें अपनी विदेश नीति के बारे में रूढ़िवादी होती हैं। विदेश नीति में मूलभूत परिवर्तन तभी होते हैं जब देश के भीतर या दुनिया में कोई विलक्षण क्रांतिकारी परिवर्तन होता है। ये सत्य है कि दुनिया के साथ भारत के संबंधों में पिछले 2 दशक में बुनियादी बदलाव देखने को मिले हैं। भारत में ऐसा होने के पीछे कई कारक हैं। भारत में पुरानी राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था ढह गई थी और बाह्य रूप से शीत युद्ध के अंत ने भारत की विदेश नीति को निर्देशित करने वाले सभी पुराने बेंचमार्कों को हटा दिया था। पुरानी व्यवस्था के कई मूल मतों को त्याग दिया और नए मतों पर आम सहमति बनी थी। सोवियत संघ के पतन और आर्थिक वैश्वीकरण की नई लहर ने भारत को बाहरी संबंधों के संचालन के लिए नए अवसर खोजने और नए तरीके से दुनियां में पांव पसारने के लिए प्रेरित किया। 1990 के दशक के बाद से, हालांकि, भारतीय नेताओं के लिए चुनौती यह रही है कि नेहरू के विचारों की पुनव्र्याख्या की जाए ताकि नए राजनीतिक संदर्भ का सामना किया जा सके। नए भारतीय नेता न तो नेहरू की निंदा कर सकते थे और न ही औपचारिक रूप से नेहरू के विचारों को अस्वीकार कर सकते थे, क्योंकि इससे गंभीर राजनीतिक परेशानी पैदा हो सकती थी। फिर भी उन्हें नई आवश्यकताओं के अनुरूप भारत की विदेश नीति में लगातार सुधार करते रहना पड़ा। यह आसान नहीं रहा है। नए की अनिवार्यता और विदेश नीति का संचालन करने के बारे में पुराने विचारों के प्रतिरोध के बीच तनाव वास्तविक है और निकट भविष्य में खत्म होने की संभावना नहीं है। पुराने के प्रति लगाव और नए के प्रति भय की भावना भारतीय कूटनीति के सभी पहलुओं में अमेरिका को उलझाने से लेकर छोटे से छोटे पड़ोसियों के प्रति अपनायी गयी रणनीति तक में दिखाई देता रहता है। भारत की “नई“ विदेश नीति का कार्य वास्तव में प्रगति पर है। फिर भी यह देखना मुश्किल नहीं है कि आंतरिक और बाह्य आवेगों के बीच भारतीय कूटनीति की दिशा काफी बदल गई है।
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Pages:14-16
How to cite this article:
Ashutosh Singh "भारतीय विदेश नीति में वर्ष 1990 के बाद आए परिवर्तनों का संक्षिप्त अध्ययन ". International Journal of Sociology and Political Science, Vol 3, Issue 2, 2021, Pages 14-16
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