International Journal of Sociology and Political Science

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International Journal of Sociology and Political Science
2021, Vol. 3, Issue 2
अनुच्छेद 21 का विस्तृतीकरण भारतीय सर्वोच्च न्यायलय, मूल अधिकार एवं अनुमानित अधिकार

डॉ. अनुराग पांडेय

“संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों को समस्त नागरिकों के बुनियादी एवं मूल मानव अधिकार के रूप में परिभाषित किया गया है। संविधान के भाग III में लिखित एवं व्याक्खित विभिन्न मौलिक अधिकार नस्ल, जन्म-स्थान, जाति, पंथ या लिंग के आधार पर भेदभाव का पूर्णतया निषेध करते हैं, जो देश के नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं। ये समस्त अधिकार विशिष्ट प्रतिबंधों के अधीन अदालतों द्वारा प्रवर्तनीय हैं। भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने समय समय पर इन मौलिक अधिकारों की नई व्याख्या करि है और कुछ नए प्रावधानों को जोड़ा है, न्यायालय ने मुख्य रूप से अनुच्छेद 21 को विस्तृत किया है। अनुच्छेद 21 के इसी विस्तृतीकरण को अनुमानित अधिकार कहा जाता है जिसमें भारतीय नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को पहले से ज्यादा मजबूती दी गई है। प्रस्तुत लेख इन्ही कुछ बिन्दुओ पर प्रकाश डालता है।“
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डॉ. अनुराग पांडेय. अनुच्छेद 21 का विस्तृतीकरण भारतीय सर्वोच्च न्यायलय, मूल अधिकार एवं अनुमानित अधिकार. International Journal of Sociology and Political Science, Volume 3, Issue 2, 2021, Pages 31-37
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